शुक्रवार, 25 जून 2010
राष्ट्रीय महिला सशक्तीकरण नीति 2001
राष्ट्रीय महिला सशक्तीकरण नीति 2001में भी सरकार मानी थी कि महिला की स्थिति के प्रश्न पर संविधान, सरकारी नीतियों , योजनाओं, कार्यक्रमों, व कानूनों में लक्षित उद्दे्श्यों व जमीनी सच्चाई के बीच में बहुत बड़ी खाई है।इसीलिए राष्ट्रीय महिला सशक्तीकरण नीति 2001 के उद्देश्यों और लक्ष्यों में महिलाओं का विकास, प्रगति व सशक्तिकरण रखा गया। सकारात्मक आर्थिक, सामाजिक नीतियों के माध्यम से ऐसा वातावरण बनाने का आश्वासन दिया गया जिसमें आम नारी अपने व्यक्तित्व का चहुमुखी विकास कर सके। जीवन के हर क्षेत्र—सामाजिक , राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक व नागरिक क्षेत्रों में समस्त मूल अधिकारों , मानव अधिकारों, का उपभोग समानता के आधार पर कर सके। राष्ट्र के आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक मामलों में नीति निर्धारण में समान भागीदारी सुनिश्चित करना। नारी को शिक्षा, स्वास्थ्य़ सुविधाओं की समानरूप से उपलब्धता सुनिश्चित करना। समान काम के लिए समान मजदूरी मिलना, काम की जगह स्वास्थ्य व सामाजिक सुरक्षा मुहैय्या करना विकास प्रक्रिया में जैनडर perspective को समाहित करना, स्त्रियों व बच्चियों के विरुद्ध हर प्रकार की हिंसा व भेदभाव दूर करना आदि आदि मुख्य लक्ष्य बताए गए। पितृसत्तात्मक समाज में संपत्ति के अधिकारों की अवधारणा ने नारी की स्थिति दोयम दर्जे की बना दी है। अतः संपत्ति के मालिकाना हक, उत्तराधिकार की सुनिश्चितता को न्यायोचित बनाने के लिए कानून में परिवर्तन करने के लिए वातावरण बनाने की कोशिश करने का वादा किया गया।
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